‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:विजय के खिलाफ मिला ऐसा सबूत, जो सालों से बनाई कहानी को कर सकता है खत्म
अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ (दृश्यम 3) का ऑफिशियल ट्रेलर बुधवार को रिलीज हो गया। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कहानी में 2 अक्टूबर की तारीख एक बार फिर अहम है। दृश्यम 3 को ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का आखिरी चैप्टर बताया गया है। इसमें अजय देवगन का किरदार विजय सालगांवकर एक बार फिर अपने परिवार के डार्क सीक्रेट को कानून से बचाने की कोशिश करते नजर आएंगे। ट्रेलर 2 मिनट 52 सेकंड लंबा है। फिल्म में अजय देवगन विजय, तब्बू IG मीरा देशमुख और श्रिया सरन नंदिनी के किरदार में लौट रही हैं। इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जो विजय के खिलाफ जांच को और मजबूत करते हैं। विजय के सामने नई चुनौती ट्रेलर में दिखाया गया है कि मामला अब सिर्फ दिमागी खेल नहीं रहा, बल्कि विजय और पुलिस के बीच अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। ट्रेलर में अजय देवगन कहते हैं, “उनके बहुत ही मजबूत सबूत हैं। जयदीप अहलावत फिल्म में क्राइम ब्रांच के SP की भूमिका में हैं। वह विजय को कमतर आंकने के बजाय उसकी समझ और चालाकी को पहचानते हैं। इसी बदलाव के बीच विजय का सामना पहले से ज्यादा खतरनाक चुनौती से होता है। ट्रेलर में प्रकाश राज का किरदार विजय के लिए कहता है, “अनपढ़ है, बेवकूफ नहीं। इसे मैं हल्के में लेने की कोशिश नहीं करूंगा।” वहीं एक अन्य डायलॉग में विजय को “गोवा का सबसे बड़ा हार्ड-वर्किंग क्रिमिनल” कहा गया है। कहानी में दिमागी खेल से आगे बढ़कर किस्मत की भूमिका भी सामने आती है। ट्रेलर में कहा गया है, “अब ये खेल दिमाग का नहीं नसीब का बन चुका है।” विजय का परिवार उसके फैसलों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विजय कहता है, “फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है।” ट्रेलर का अंत इस चुनौती के साथ होता है, “तुम सोच भी नहीं सकते कि वो साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है।” फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है और इसे स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। ‘दृश्यम’ की कहानी अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ 31 जुलाई 2015 को रिलीज हुई थी। निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी यह फिल्म मलयालम फिल्म ‘दृश्यम’ की हिंदी रीमेक थी। फिल्म में अजय देवगन के साथ तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी गोवा में रहने वाले विजय सालगांवकर के परिवार की है। विजय चौथी कक्षा तक पढ़ा है और केबल ऑपरेटर का काम करता है। उसे फिल्में देखने का बहुत शौक है। वह फिल्मों से कई चीजें सीखता भी है। विजय की जिंदगी तब बदल जाती है, जब उसकी बड़ी बेटी अंजू के साथ एक गंभीर घटना होती है। पुलिस अधिकारी मीरा देशमुख का बेटा सैम अंजू को परेशान और ब्लैकमेल करता है। इसी दौरान एक हादसे में अंजू के हाथों सैम की मौत हो जाती है। अपने परिवार को जेल जाने से बचाने के लिए विजय एक बड़ी योजना बनाता है। वह परिवार के साथ मिलकर ऐसी कहानी तैयार करता है, जिससे पुलिस को लगे कि वे 2 और 3 अक्टूबर को गोवा से बाहर थे। विजय होटल की बुकिंग, फिल्म देखने के टिकट और दूसरे सबूतों के जरिए अपनी कहानी को मजबूत करता है। मीरा देशमुख को पूरा शक विजय के परिवार पर होता है। पुलिस बार-बार पूछताछ करती है और परिवार पर दबाव बनाती है। लेकिन विजय हर सवाल का जवाब अपनी बनाई कहानी के हिसाब से देता है। फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि क्या पुलिस विजय के परिवार तक पहुंच पाएगी? आखिर में विजय अपने परिवार को बचाने में कामयाब होता है।
