पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग प्रस्ताव ला रही मोदी सरकार

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Yashwant Verma

नई दिल्ली(एजेंसी)। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए मोदी सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरु की है। इसके लिए लोकसभा सांसदों के साइन जुटाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई सांसदों से महाभियोग के प्रस्ताव पर दस्तखत लिए जा चुके हैं। इससे साफ हैं कि प्रस्ताव लोकसभा में लाया जा सकता है। लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरुरी होते हैं। वहीं, राज्यसभा में यह संख्या 50 होती है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही बता चुके हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने का प्रस्ताव मानसून सत्र में लाया जाएगा। जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में 14 मार्च की रात आग लगी थी। यहां से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे। जस्टिस वर्मा फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज हैं। दिल्ली हाईकोर्ट से उनका ट्रांसफर किया गया था। हालांकि, उन्हें किसी भी तरह का न्यायिक कार्य सौंपने पर रोक है। कैश केस की जांच कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रिपोर्ट 19 जून को सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोर रूम पर सीक्रेट या सक्रिय कंट्रोल था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाले तीन जजों के पैनल ने 10 दिनों तक जांच की। 55 गवाहों से पूछताछ की और जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास का दौरा किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को ध्यान में रखते हुए पैनल इस बात पर सहमत है कि सीजेआई के 22 मार्च के लेटर में लगाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।

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